ख्रीस्त के वीर जलाओ दीपक अमर प्यार का तुम ।
1. रवि से छूटी किरण समान, जलते दीपक तुम ।
तम में जलना शीत में गलना यही चुनौति आज ।
बनो विजेता सारे जगत् के तम का तुम ही आज़ ।
2. इस धरती के बंजर भूमि की फुलवारी हो तुम ।
नीले गगन के जगमग तारे रश्मि रथी हो तुम ।
सेवा-प्रेम ही पुण्य पंथ है भूल न जाना तुम ।
3. करके दिखाओ निज प्रांगण में सदाचरण का तुम ।
बहती रहेगी प्रेम भाव की अमृत – धारा आज़ ।
मान मर्यादा और ज्ञान का सुन्दर चमन हो तुम ।
Song Link –
New Song (Naya Gaan) Page no. 114,
Hymn no. 20.
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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