प्रभुवर मुझे अपनी शाँन्ति का प्रचारक बना ।
प्रभुवर मुझे ।
1. जहाँ घृणा है प्रेम वहाँ उपजाऊँ , ( 2 )
स्वार्थ जहाँ है वहाँ उपकार करूँ ।
2. जहाँ न विश्वास ईशवचन समझाऊँ, ( 2 )
जहाँ उदासी वहाँ हरियाली भरूँ ।
3. जहाँ निराशा आशा का वहाँ संचार करूँ, (2)
जहाँ अन्धेरा वहाँ उजाला भरूँ ।
Song Link –
New Song (Naya Gaan) Page no. 116,
Hymn no. 25.
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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