प्रभो, मैं तेरी दासी हूँ (2)
तेरा वचन है मुझे स्वीकार
मुझपर तूने कृपादृष्टि की
धन्य धन्य हो तेरा नाम । (2)
1. अब से कहेंगी सभी पीढ़ियां
धन्य कुँवारी मरियम माँ
पुलकित है मेरी आत्मा
कितना महान् ये वरदान।
2. तितर-बितर हैं अहंकारी जन
चूर-चूर है उनकी शान
दीन-हीन हैं आसन बैठे
अनुपम है प्रभु का विधान ।
Song Link –
New Song (Naya Gaan) Page no. 202,
Hymn no. 21.
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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