ख्रीस्त – जयंती
शुभ्र-शान्त-शुचि, नीरव, निर्मल, पुण्य-पावनी रात है ।
शुभ्र-शान्त-शुचि , नीरव , निर्मल ।
1. निखिल विश्व निस्तब्ध समुज्ज्वल, ( 2)
शोभित परम येसु -शिशु कोमल,
माता मरिया की गोदी से (2)
आज गगन भी मात है । पुण्य-पावनी रात है ।
2. सो जा, शिशु पावन, जगत्राता, (2)
मुग्ध स्वर्ग आराधन गाता ,
प्रभु के प्रहरी बने गड़ेरिये, (2)
भक्ति-भाव की बात है । पुण्य-पावनी रात है ।
3. दीप्त ईश-सुत का मुख-मण्डल, ( 2 )
प्रभा प्रसारित करता प्रतिपल, ( 2 )
दिशा-दिशा शीतल प्रकाशमय (2)
झरता ज्योति-प्रभात है । पुण्य-पावनी रात है ।
4. आभामय को आभा प्यारी, ( 2)
यह छवि सब छवियों से न्यारी
देवदूत गा रहे मग्न हो ( 2 )
आता मुक्ति प्रभात है । पुण्य-पावनी रात है।
Song Link –
New Song (Naya Gaan) Page no. 119,
Hymn no. 2.
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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