प्रभु का प्रेम अनादि प्रेम,
प्रभु का प्रेम अनन्त प्रेम,
उसका दिल है करुणा धाम,
हर दुःख हरना उसका काम ।
1. जिसे न कोई रोक सके मजहब की दीवार
जिसे न कोई बेच सके दौलत का व्यापार ।
प्रभु हमारा आश्रय है । प्रभु हमारा सहचर है ।
2. दीन-दुखी को न्याय दिलाता, प्रभु है परम उदार
उसकी करुणा अपरंपार खुशियों का अंबार
प्रभु हमारा आश्रय है । प्रभु हमारा सहचर डै ।
3. वह निर्बल को सबल बनाता, प्रभु के कार्य महान् ‘
वह भक्तों को करता सदा, चिर आनन्द प्रदान
प्रभु हमारा आश्रय है । प्रभु हमारा सहचर है ।
Song Link –
New Song (Naya Gaan) Page no. 84,
Hymn no. 13.
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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