जीवन रोटी है देह प्रभु की
जीवन पाता उसे जो खाता
उसके दिल में प्रभु बसता है । ( 2 )
1. जैसे रोटी एक ही है ( 2 )
वैसे ही हम हैं एक शरीर । (2)
2. क्योंकि हम हैं एक रोटी के (2)
एक कटोरे के सहभागी हैं । (2)
3. जैसे दुनियाँ का मैं नहीं हूँ ( 2 )
बैसे वे भी दुनियाँ के नहीं हैं । (2)
4. उन्हीं के लिए मैं हूँ समर्पित (2)
सत्य के कारण वे हों समर्पित । (2)
5. जैसे बसता है तू मुझमें (2 )
वैसे ही वे भी एक हो जाएँ । (2)
6. एक हो जाएँ जब वे सभी (2)
दुनिया जानेगी तूने मुझे । ( 2 )
Song Link –
New Song (Naya Gaan) Page no. 105,
Hymn no. 51.
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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