स्तोत्र 96 (ख)
देश – देश में स्तवन प्रभु का । हर्षित मन से पूजन उसका ।
1. उसके सम्मुख हम सब जाएँ । उसकी जयगाथा हम गाएँ । हम हैं उसके, वह उत्पादक । ईश है वह, प्रभु जगदोद्धारक ।
2. जनसमूह का पालनकर्ता । हम हैं मेष और वह त्राता । कीर्तन गाकर मदिर जाएँ । आँगन मे उसका नाम गाए ।
3. आभारी होना है हमको । प्रेम – दान वह देता सब को । हमपर उसकी दया सर्वदा । इसी वचन का है सदा वफा ।
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New Song (Naya Gaan) Page no. 56,
Hymn no. 96 (ख).
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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