स्तोत्र 9
अल्लेलूया, अल्लेलूया, अल्लेलूया ।
1. प्रभु का प्रताप महान् है, मन्दिर में यशोगान करें ।
2. प्रभु के कार्य महान् हैं, सर्वोच्च में यशोगान करें ।
3. तुरही की जय जय ध्वनि में,
नृत्य और ढोल की लय लय में ।
4. सितार वीणा बजती रहें,
तानपूरा मुरली के स्वर स्वर में ।
5. हर्षित झाँझ की जयकार में,
सब राष्ट्रों, प्रभु कीर्ति करें ।
6. पिता की जय हो जय हो सुत की,
पावन आत्मा की जय वैसी ।
7. आदि में जय जैसी उनकी, अब है,
युग-युग हो भी वैसी ।
Song Link –
New Song (Naya Gaan) Page no. 50,
Hymn no. 9.
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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