स्तोत्र 1 (क)
धन्य है वह मनुष्य (2)
जो प्रभु का नियम हदय से चाहता है
दिन रात उसका मनन करता है
1. धन्य है वह मनुष्य (2)
जो दुष्टो की सलाह नहीं मानता
पापियों के मार्ग पर नहीं चलता
और अधर्मियों के साथ नहीं बैठता ।
2. वह उस वृक्ष के सदृश्य है (2)
जो जलस्रोत के पास लगाया गया
जो समय पर फल देता है
जिसके पत्ते कभी मुर्झाते नहीं
वह जो भी करता सफल होता है ।
Song Link –
New Song (Naya Gaan) Page no. 48,
Hymn no. 1 (क).
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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