स्तोत्र 19
जो ईश्वर ने खेल रचाया ।
नभ ने उसका वैभव गाया ।
1. दिन दिन में संदेश की धारा ।
रात में बहता ज्ञान है सारा ।
भाषण कुछ वह देता नहीं है ।
वाणी बिना आवाज रही है ।
2. नभ की वाणी फिर भी गूँजे ।
दसों दिशा में सारे जग में ।
रवि का डेरा एक क्षितिज पर ।
प्रभु की रचना है यह सुन्दर ।
3. सदानंद सूरज संचारी ।
दूल्हे की जिस तरह सवारी ।
बलाढ्य कोई पहलवान के ।
समान, सूरज हर्षित होके ।
4. पूर्व दिशा से नित्य निकलकर ।
आता है वह पश्चिम तट पर ।
कैसे छुपेगा कोई धूप में ।
दुनिया की हर चीज नजर में ।
Song Link –
New Song (Naya Gaan) Page no. 51,
Hymn no. 19.
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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