1. हे प्रभुवर, चालीस दिनों
रहे आप थे भूखे-प्यासे,
और हमारे हेतु कष्ट सह
की थी विनती परम पिता से ।
हमें सिखाएँ साथ आपके
हम निज पापों पर पछताएँ,
रहें सदा संयुवत आप से
दूर आप से कभी न जाएँ ।
3. किया आप ने दुष्ट आत्मा
से जैसे संघर्ष भयंकर
पायी विजय प्रलोभन पर थी,
वही शक्ति दे हमको, प्रभुवर ।
4. हम भी रहें जागते, प्रतिफल
रहे आप से सदा निकटतर,
हम भी विजयी बनें शत्रु पर
शक्ति आपसे, हे प्रभु, पाकर ।
5. प्यास – भूख का दमन किया था,
नाथ, आपने वन में जैसे,
आत्मा दमन हम करें उसी विधि
जीएँ हम तब अमर वचन से ।
6. तप के इन चालीस दिनों में,
नाथ, आइए और निकटतर,
निज दु:ख़भोग अवधि में भी नित
रहिए निकट हमारे, प्रभुवर ।
Song Link –
New Song (Naya Gaan) Page no. 135,
Hymn no. 4.
Hymn Book – (Naya Gaan)Sangeet Sagar
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